दोस्तों, नॉर्वे यूरोप का एक देश है। इस देश का कुछ उत्तरी हिस्सा ऐसा है, जहां महीनों तक सूरज नहीं डूबता। इस लेख में हम आपको इस देश के इतिहास की जानकारी देंगे।
नॉर्वे देश का इतिहास – Norway History in Hindi
नॉर्वे में मनुष्यों ने कब बसना शुरू किया?
लगभग 9000 ईसा पूर्व, यानी कि 11000 साल पहले इंसानों ने नॉर्वे में बसना शुरू किया। यह पहले हिम युग का अंतिम समय था।
शुरुआती वसनीक शिकार, और फिशिंग के जरिए अपना भोजन प्राप्त करते थे।
लगभग 500 ईसा पूर्व के बाद खेती-बाड़ी लोकप्रिय हुई। यूरोप और नॉर्वे के इतिहास में इस समय को कांस्य युग (Bronze Age) कहा जाता है, क्योंकि इस समय ज्यादातर हथियार और आभूषण इसी धातु के बनाए जाते थे।
वाइकिंग युग – Viking History in Hindi
वाइकिंगजाति के लोग नॉर्वे के इतिहास में प्रमुख स्थान रखते हैं। 800 ईस्वी से लेकर 1050 ईस्वी तक यह लोग नॉर्वे में अपने शिखर पर थे।
वाइकिंग लोग आयरलैंड, फ्रांस, ब्रिटेन और यूरोप के कुछ अन्य हिस्सों को रौंदते हुए नॉर्वे पहुंचे थे। यह लोग क्रूर योद्धा तो थे ही, लेकिन साथ में अपनी कारीगरी, व्यापार कुशलता और शासन प्रबंध के लिए भी जाने जाते थे।
वाइकिंग लोगों ने यूरोप के अन्य हिस्सों की तरह नॉर्वे में भी कई नए शहर बसाए। जब नॉर्वे के राजा Harald Hardrada ने 1066 ईस्वी में, सफलतापूर्वक इंग्लैंड को जीत लिया, तो नॉर्वे से वाइकिंग युग का अंत हो गया।
स्टेव चर्च – Stave Churches
1030 ईस्वी में नॉर्वे में, ईसाई धर्म को अपना लिया गया। वाइकिंग युग खत्म होते ही देश में, चर्चो का बोलबाला हो गया।
नॉर्वे में लकड़ी के खास तरह की आकृतियों वाले चर्चो का निर्माण किया जाता था, जिन्हें स्टेव चर्च कहा जाता था।
नॉर्वे में स्टेव चर्चों का प्रभुत्व सोलवीं सदी तक रहा और पुनर्जागरण के बढ़ते प्रभाव के कारण यह धीरे-धीरे खत्म हो गया।
Urnes Stave Church , नॉर्वे का सबसे पुराना ज्ञात स्टेव चर्च बताया जाता है, जो कि अब तक अस्तित्व में है। यह चर्च 1150 ईस्वी के आसपास का बना हुआ बताया जाता है।
स्वतंत्र नॉर्वे
1536 ईस्वी से लेकर 1814 तक, नॉर्वे डेनमार्क की dependency (निर्भर देश) रहा। 1814 से लेकर 1905 तक, यह स्वीडन के साथ यूनियन में रहा।
1905 में नॉर्वे ने स्वयं को एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया।
दोनों विश्व युद्ध
1914 में, यूरोप में शुरू हुए पहले विश्व युद्ध में, नॉर्वे, स्वीडन और डेनमार्क ने तटस्थ (neutral) रहने का फैसला किया।
पहले विश्व युद्ध की तरह, दूसरे विश्व युद्ध में भी नॉर्वे ने तटस्थ रहने का फैसला किया। लेकिन जब जर्मनी ने ही पहले नॉर्वे पर हमला कर दिया, तो क्या किया जा सकता था।
अप्रैल 1940 में , जर्मन फौजो ने नॉर्वे पर धावा बोल दिया, और देश की प्रमुख बंदरगाहों पर अपना कब्ज़ा जमा लिया। नॉर्वे के शाही परिवार ने भागकर लंदन में शरण ली।
जैसे ही मई 1945 में जर्मन सेना ने बर्लिन में सरेंडर किया, तो नॉर्वे भी जर्मनी के चंगुल से आज़ाद हो गया।
नार्वे की अर्थव्यवस्था का इतिहास – History of the Economy of Norway in Hindi
नार्वे में औद्योगीकरण की शुरूआत 1840 के दशक में शुरू हुई थी। शिपिंग और हाइड्रो इलेक्ट्रिसिटी से देश को ज्यादातर आमदन होती थी।
अर्थव्यवस्था के ऊपर-नीचे रहने के कारण ही 1860 के बाद नार्वे के लोग बड़े पैमाने पर उत्तरी अमेरिका में जा बसे।
1929 में आई वैश्विक महामंदी (Great Depression) ने, नॉर्वे को भी अपनी चपेट में ले लिया। व्यापार, समुद्री परिवहन और बैंकों को खासा नुकसान हुआ। करेंसी की कीमत गिर गई। बेरोज़गारी अपने चरम पर थी। बाकी दुनिया की तरह नॉर्वे में भी यह स्थिति दूसरे विश्व युद्ध की शुरुआत (1939) तक बनी रही।
यहां पर तेल की खोज साल 1969 में हुई थी और साल 1995 आते-आते नार्वे दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल का निर्यातक बन गया।
आज भले ही नार्वे तेल का इतना बड़ा निर्यातक नहीं है लेकिन फिर भी पहले हुई कमाई के कारण आज नार्वे के पास बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा भंडार हैं।
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